Thursday, August 9, 2018

Motivational story in Hindi for success - आत्मविश्वाश बडाये

नमस्कार प्रिय पाठक आज हम कुछ motivational बिज़नस स्टोरी को जानेंगे की उन्होंने किस तरह अपने बिज़नस को succes बनाया और क्या क्या किया.


Motivational story in Hindi for success
Source- Google.com
बहुत से एसे Entreprenure है जिन्होंने अपने जीवन में संघर्स करके अपने बिज़नस को succes बनाया एसी बहुत सी स्टोरी इन्टरनेट पर है अगर आप सर्च करेंगे Success Businessman story तो आपको बहुत से एसे लोगो की स्टोरी मिल जाएगी जो की कई बार हार का सामना करने के बाद भी हिम्मत नही हारे तो चलिए जानते है कुछ एसी ही नयी स्टोरी को हा में आपको कुछ नए युवाओ की succes स्टोरी बताने जा रहा हु.

Motivational Story in Hindi for success


किसी काम को करने से बचने के लिए बहाने ढूंडने के बजाये आगे बढकर चुनोतिया स्वीकार करने और आत्मविश्वास के साथ उन्हें पूरा करने वाले कर्मचारी न सिर्फ अपनी अलग पहचान बनाते हे, बल्कि बेहतर इन्क्रीमेंट और प्रोमोशन का इनाम भी पाते हे!

आईये जानते है अर्णव की succes Journey - 

बेंगलूर के अभिलाषा नरहरी ने अपने सह संस्थापको के साथ मिलकर एलेनीक नाम से एसा एप आधारीत ऑनलाइन प्लेटफार्म शुरू कीया है  जहा पुराने फेशन परिधान ऐक्सेसरी और जीवन शेली से जुडी अन्य वस्तुए उपलब्ध है 

बेहद कम समय में इस ऐप के दो लाख से अधीक डाउन्लोडस और 65 हजार से अधिक एक्टिव यूजर इसका सफ्फलता की बनेगी पेश कर रहे है अभिलाषा यहाँ अपनी यात्रा के बारे में बता रहे है

सिर्फ लक्ष्य पर रखें ध्यान - अभिलाषा

Source -Tes 
में हमेशा से उधमी बनना चाहता था आईआईटी खड़गपुर में पड़ते हुवे वहा के enterprenureship सेल में काफी सक्रीय रहा कारोबार से सम्बंधीत  मसलो को सोल्झाने  में गहरी दील्चस्पी रहती थी जब आईटीसी फुर्ड्स कम्पनी में बतोर प्रोजेक्ट मेनेजर काम करना शीरु कीया तो वहा के आनुभाओ ने दुसरी बारीक हकीकतो से सामना कराया बहुत कुछ शीखा इसी दोरान जब पत्नी को अपना मोबाइलफोन बेचने में दिक्कते आई तो हमे पुराने लाईफस्टाइल फैशन गुट्स के बाजार में कारोबार का अवसर आया इसके बाद ही एलेनीक  के नीव पडी  
                                                                                      
बाजार की माग को देखा

-कामर्स में प्री -ओन्ड यानी पुराने सामान समान का बाजार अभी पुरी तरह से विकसीत नही हुवा है आम भारतीयों के मन में तमाम प्रकार की धारणाये है बेशक अलामरीयो में कपडे से लेकर तमाम प्रकार की वस्तुऐ वर्षो तक सह्जाकर रखते है लेकीन एक दो बार इस्तमाल के बाद उनका कोई उपयोग नही होता पुराने सामान की विश्वसनीयता कम होने से इसके खरीदार भी कम मलते है हम इसी अविश्वास को ख़त्म करने की कोशीश कर रहे है ग्राहकों के सशय और संदेह को दूर करने की में वक्त लग रहा है जागरूक करने की प्रकिया जरी है क्योकि हमें मालूम है की बाजार में इसकी माग है खासकर युवाको  महिलाओं में 

कारोबार में है कड़ी मेहनत


आज बहुत से योवा नोकरी छोड़ उधमीता रहे है लेकीन उन्हें समझाना होगा की स्टार्ट -आप में सप्ताह में सतो दिन चोवीसो  घंटे कम करना पड़ता है नीद के लीए पर्याप्त समय नही मिलता सामाजीक मेलजोल कम हो जाता है समूचा ध्यान लक्ष्य पर केंदीत रखाना होता इससे कई बार इंसान दबाव में भी जाता है कुछ गलत फेसले भी हो जाते है इसलीय समय -समय पर उनकी समीझा भी करनी होती है में इस मामले में खुशनसीब रहा की टीम हर मुश्कील घड़ी में साथ रही मेरा मानना है की कारोबार मी आपको स्वत; प्रेरित रहना पड़ता है

बिज़नस में succes कैसे पाए? 


यह फार्मूले हर फिल्ड में लागू होता हे! आखिर क्यों जरूरी हे काम में पहल करना? आइये जानते हे...!

अर्णव और पुनीत ने एक साथ Graguation और एमबीए किया था! सयोग से दोनों को एक ही कम्पनी में एक्जक्युटीव के पद पर जॉब मिल गई! वह उन दोनों को काम करते हुए दस साल हो रहे हे! इतने वर्सो में जहा वर्णव हर दुसरे साल प्रोमोशन पाते हुए आज कम्पनी में जनरल मेनेजर बन गए हे, व्ही पुनीत सीनियर एक्जेक्युटिव ही बने हुए हे! दरअसल, एक जेसी क्वालिफिकेसंन होने के बावजूद दोनों की उपलब्धियों में यह अंतर उनके एट्टीट्युड और काम करने के तरीके से आया हे! अर्णव किसी भी काम को लेकर बेहद उत्साह में रहते हे! नियमित कार्यो के अलावा वे अपने सीनियर को नए आइडिया भी देते रहते हे! उन्हें जो भी काम दिया जाये उसे वे न की समय से पूरा करते हे, बल्कि उसमे उम्मीद से बेहतर परिणाम भी देते हे! उनके कार्यो की वजह सीनियर कोण भी अक्सर सराहा जाता हे! विभाग को जब भी नए और चुनौती पूर्ण कार्य मिलते हे, तो इसके लिए सबसे पहले अर्णव और उनकी टीम को ही याद किया जाता हे! निरंतर अच्छे प्रदर्सन और इनोवेसन के कारण ही अर्णव को समय से पहले ही प्रमोसन और आकर्षक इन्क्रीमेंट मिलते है उधर पुनीत अपने नियमित कार्यो को को बौझ समझ कर करते हे! उन्हें जब भी कोई नया काम सोपने की बात की जाती हे, तो उसमे ये पहले ही तमाम किन्तु परन्तु गिना देते हे, ताकि उन्हें वह काम दिया ही नही जाए ! काम न मिलने पर वे खुश भी होते हे की देखो, केसे बॉस को घुमाया लेकिन यह सब करते हुए वे यह जाते हे की इससे सीनियर्स के मन में उनके प्रति केसी धारणा बनती हे उन्हें जो भी कार्य दिए गए हे, उनमे भी तमाम तरह की गलतिया रह जाती हे इस पर भी वे इन्हें समय पर पूरा नही कर पाते! दरअसल, वे एसा जानबुझकर करते रहे है! इसके बावजूद वे एसा प्रदर्सित करते हे हे, मानो बेहद व्यस्त हों !

उत्साह की आदत

कम्पनी या विभाग द्वारा अपनी आवश्यकता के अनुसार ही आपको काम दिया जाता हे, वः चाहे आपकी पसंद का हो या न हो! अब जब वः कम आपको करना ही है, तो बी इना रूचि लिए आप उसे अच्छी तरह नही कर सकते !

स्वीकारे चुनोतिया

कार्य स्थल पर अपनी अलग पहचान तभी बनती हे,जब आप नियमित कार्यों के अलावा कुछ हटकर करते हे! इसके लिए सीनियर के समक्ष नए इडिया पेस करने के साथ-साथ नयी चुनोतियो को आगे बढकर स्वीकार करने की पहल भी करनी होती हे! सीनियर्स की पहली पसंद व्ही होते हे, जो चेहरा छिपाने की बजाये age बढकर जिउम्मेदारी लेना पसंद करते हे !

गलतियों से सबक

सकारात्मक रवैया रखने वाले लोग हर कम को गम्भी से करते है, अगर खी कोई लती हो भी जाती हे, तो इसे वे सबक के रूप में लेते हुए हमेशा याद रखते हे और आगे कभी उसे दोहराते नही !

टीम से तालमेल

Motivational story in Hindi for successएक लीडर के रूप में आगे  बढने के लिए जरूरी हे टीम के साथ समझदारी भरा तालमेल रखना ! अच्छा टीम लीडर व्ही हे, जो जनता हे की टीम के किस सदस्य की क्या खूबी हे, किससे कोनसा काम ठीक से कराया जा सकता हे! किसी सदस्य द्वारा अच्छा कम करने पर उसकी तारीफ करना और गलती होने पर उसे समझाना एक अच्छे नेत्रत्वकर्ता की पहचान होती हे

तो आज की इस Motivational story से आपको क्या सिखने को मिला आप हमें कमेन्ट करके बताये और स्टोरी के लिए हमारे ब्लॉग को विजिट करे 


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